शारदा एक्ट अथवा बाल विवाह निरोधक अधिनियम क्या है? sharda bal vivah adhiniyam 1928 kya hai

बाल विवाह एक्ट
शारदा एक्ट sharda act 1978 kya hai
बाल विवाह रोकने के लिए शारदा एक्ट अधिनियम भी प्रभावी नहीं रहा। जिसके कारण सन 1978 में शारदा एक्ट अधिनियम में संशोधन किया गया। यह अधिनियम अब बाल विवाह निरोधक अधिनियम 1978 के नाम से जाना जाता हैं।
सन् 1928 में बाल विवाह पर पूर्णतया रोक रोक लगाने हेतु एक कानून पारित किया गया जिसे शारदा एक्ट के नाम से जाना जाता है।

यह अधिनियम भारत में अच्छी तरह से प्रभावी नहीं रहा जिससे इस अधिनियम में संसोधन की आवश्यकता पड़ी
इसलिए इस एक्ट में सन् 1978 में संसोधन किया गया
इस संशोधित अधिनियम को शारदा बाल विवाह निरोधक अधिनियम या शारदा एक्ट के नाम से जाना जाता है।
इस संशोधित अधिनियम में निम्न प्रावधान किए गए जिसका कड़ाई से पालन कराना सुनिश्चत किया गया। 

इस अधिनियम में वर्णित प्रावधान निम्नलिखित हैं
1- लड़कों के विवाह हेतु न्यूनतम आयु 21 वर्ष और लड़कियों के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई।
2- इस अधिनियम में वर्णित नियमों की अवहेलना करने पर आरोपी को 1973 की दंड संहिता के अनुसार सजा का प्रावधान किया गया।
3- शारदा एक्ट में प्रावधान कि़या गया कि मजिस्ट्रेट द्वारा इससे सम्बन्धित केस की सुनवाई की जाएगी।

भारत में शारदा एक्ट के लागू होने पर काफी हद तक बाल विवाह पर रोक लग गई किंतु अशिक्षित जनसंख्या में आज भी बाल विवाह के उदाहरण यदा कदा सामने आते रहते हैं जिससे एक बार फिर भारत सरकार को आवश्यकता है कि इस अधिनियम को प्रभावी बनाने हेतु कड़े और आवश्यक कदम उठाए।
आज आवश्यकता है कि देश में बाल विवाह की रोक हेतु शारदा एक्ट का नवीनतम प्रारूप लागू किया जाए।