पिछड़े बालक कौन होते हैं? Backward children in Hindi

पिछड़े बालक
पिछड़े बालक शब्द से ही हम अनुमान लगा सकते है कि ये बालक वो होते हैं जो विभिन्न प्रकार से पिछड़ जाते हैं। 
ये बालक शिक्षा के किसी भी क्षेत्र में पिछड़ सकते हैं जैसे अधिगम में या शैक्षिक प्रगति के क्षेत्र में। 

पिछड़ा बालक ( Backward child) 
पिछड़ा बालक वह होता है जो वर्तमान परिवेश में दी जा रही शिक्षा या कक्षा कक्ष में ठीक तरह से अधिगम नहीं कर पाते और उनकी शैक्षिक प्रगति होने की बजाए अवनति होने लगती है। 
जरूरी नहीं कि जिस बालक का बुध्दि लब्धि स्तर कम है वही पिछड़ा बालक है। 
पिछड़ा बालक वह भी हो सकता है जिसका आई क्यू लेवल सामान्य से बहुत अधिक है क्योंकि उसे भी अधिगम के लिए सामान्य परिस्थितियां प्रदान करने पर भी वह ठीक ढंग से अधिगम नहीं कर पाता और उसकी आशातीत शैक्षिक प्रगति नहीं हो पाती।

बालक के पिछड़ेपन का कारण

किसी बालक का सामान्य वातावरण में ठीक ढंग से न रह पाना और ठीक तरह से अधिगम न करने के कई कारण हो सकते हैं जिनमें किसी बालक के पिछड़ेपन के प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं। 

1- शारीरिक या मानसिक कारक 
किसी बालक में शारीरिक या मानसिक विकार उसकी निम्न शैक्षिक उपलब्धि का कारण हो सकता है और वह सामान्य शिक्षण अधिगम परिस्थितियों में नहीं रह पाता और पिछड़ जाता है। 

2- अशिक्षित परिवार या कलहपूर्ण परिवार 
किसी बालक के पिछड़ने का यह प्रमुख कारक है कि यदि किसी बालक को निम्न शिक्षा स्तर के लोगों की संगत मिलती है और उसका यदि बालक पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है तो वह बालक पिछड़ जाता है।
कभी कभी परिवार में लडाई झगड़े या कलह का वातावरण होने पर भी उस वातावरण का प्रभाव बालक के मानसिक स्तर पर पड़ता है ।

3- अयोग्य अध्यापक और कुशल निर्देशन का अभाव
बालक अक्सर तब भी पिछड़ जाते हैं जब बालक को अयोग्य अध्यापकों का संरक्षण मिलता है और उसे वांछित शैक्षिक वातावरण उपलब्ध नहीं हो पाता एवं उसे सही मार्गदर्शक नहीं मिल पाता तो ऐसे बालक भी सामान्य रूप से पिछड़ जाते हैं। 


पिछड़े बालक की विशेषताएं

पिछड़े बालक के निम्न लक्षण होते हैं जिसके आधार पर किसी भी बालक को पिछड़े बालक के रूप में पहचान सकते हैं।
1- पिछड़े बालक अक्सर झैंपू प्रवृत्ति के होते हैं और वे अध्यापक या मार्गदर्शक से कोई सवाल करने से डरते हैं। 
2- पिछड़े बालक की अधिगम की गति धीमी होती है। 
3- पिछड़े बालक की शैक्षिक उपलब्धि सामान्य से कम रहती है। 
4- ये बालक किसी कार्य को ठीक ढंग से नहीं कर पाते और यह गलती वे अक्सर करते हैं जिनमें वांछित सुधार नहीं हो पाता। 
5- पिछड़े बालक कक्षा की सामान्य परिस्थितियों में अक्सर असहज महसूस करते हैं और स्कूल से पलायन करने की कोशिश करते हैं। 
6- पिछड़े बालक कक्षा मे और अन्य परिवेश में एक असमायोजित बालक जैसा व्यवहार करते हैं। 

पिछड़े बालकों की शिक्षा 
पिछड़े बालकों में सुधार संभव है और उन्हें अच्छा और वांछित वातावरण प्रदान करके उनके पिछडेपन को सुधारा जा सकता है। 
पिछड़े बालकों की शिक्षा हेतु निम्न कदम उठाए जा सकते हैं ।
1- उन्हें उनकी परिस्थिति के अनुरूप शिक्षण अधिगम प्रक्रिया का वातावरण प्रदान करना। 
2- उनकी पारिवारिक परिस्थिति के बारे में जानकारी इकट्ठा करके उसके अनुरूप उसे मार्गदर्शन प्रदान करना। 
3- ऐसे बालकों के लिए विशेष कक्षा का आयोजन करके भी उनके पिछडेपन को दूर किया जा सकता है।
4- ऐसे बालको को कक्षा में या अन्यत्र प्रेरणा की आवश्यकता होती है जिसके आधार पर उनमें सुधार संभव है। 
pichhde baalak,Backward children in hindi